दर्शनेन हि तीर्थानां पावनं भवति मनः। श्रवणेन च सत्संगः, स्मरणेन हरिः स्वयं॥ तीर्थों के दर्शन से मन पवित्र होता है, सत्संग के श्रवण से और हरि का स्मरण करने से आत्मा शुद्ध होती है।