विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रता।

पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात् धर्मं ततः सुखम्॥

विद्या से विनय, विनय से पात्रता, पात्रता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है।

हमारी पहली पुस्तक

हमारी चार धाम यात्रा

हमारी पहली पुस्तक "हमारी चार धाम यात्रा भाग -प्रथम" पाठकों को उत्तराखंड चार धाम यात्रा से जुड़ी जानकारियाँ प्रदान करती है। इसमें ऐतिहासिक और धार्मिक प्रसंगों के साथ-साथ यात्रा मार्ग और अनुभवों का संकलन भी है। भविष्य में और भी पुस्तकों के माध्यम से अन्य धार्मिक यात्राओं और तीर्थ स्थलों की जानकारी साझा की जाएगी

"हमारी चार धाम यात्रा - भाग द्वितीय" शीघ्र आपके समक्ष प्रस्तुत होगी

अभी यह हमारी पहली आध्यात्मिक पुस्तक है, जो आपके आध्यात्मिक जानकारियाँ को समृद्ध बनाने का प्रयास करती है। आने वाले समय में और भी गूढ़ शिक्षाएं और रहस्य इस पुस्तक श्रृंखला को और भी विशेष बनाएंगे।